Category Archive: शेर-ओ-शायरी

चंद लफ्ज़, कुछ शायरी (सन- 2015 – पहला साल)

1.  “क्या मिला तुझे इन आँखों में झाँक के यह वो झरोखे हैं, जो बयान करते हैं, बताते नहीं.”   2. “उसने आँखों में धूल भी इतनी सफाई से झोंकी, ना आँखें नम हुई, ना आँखें बंद हुई”     3. “मेरी हर एक चीज़ में तू समाया है, सोचता हूँ, तूने मुझे, या मैंने तुझे बनाया है”     4. कभी किसी… Continue reading

अब कैसे कह दूं . . .

“अब कैसे कह दूं मैं ज़िन्दगी जी गया, सुनहरे उस प्याले में ज़हर मैं पी गया. . .” – Kabir Malik ©/ 2016

खुद ही में खुद . . .

“खुद ही में खुद एक अँधेरा हूँ मैं, उन कुछ रातों में एक बसेरा हूँ मैं. . .” – Kabir Malik ©/ 2016

“इन आँखों में . . . .

“इन आँखों में मेरे ग़म अब सूख गए हैं, अतीत के वो बंजर लम्हें हम भूल गए हैं. . .” ©/ Kabir Malik