Category Archive: कविताएं/ नज़्म

अभी वक़्त बाकी है. . .

“अभी वक़्त बाकी है,  ये ज़िन्दगी के लम्हे जो   आहिस्ता–आहिस्ता बीत रहे हैं  इनमे कुछ ख्वाब जल कर राख हो गए,  तो कुछ अरमान अभी–अभी   सुलग गए मेरे सीने में ।   मैंने रंगो में नहीं,  मौसमों में बिताई है अपनी दुनिया,  कभी बारिश में भीगा हूँ,  तो कभी बारिश से बचाता लाया हूँ, अपनी कश्ती, कागज़ की।   गर भीग जाती ये उस बारिश में,  तो मैं डूब जाता  या फिर मेरे ख्वाब नम पड़ जाते,  बेजान वो ख्वाब,   बस एक ख्वाब बनकर रह जाते।   ये तूफान का गहरा शोर भी   मेरी बबेज़ुबां आवाज़ को दबा देता हैं,  मानो, आहिस्ता-आहिस्ता गर्दन  कटती महसूस होती… Continue reading

खाली पन्नें . . .

“एक अरसे बाद तुम्हारी याद आई, ज़माना कब बदल गया महसूस ही नहीं हुआ। शायद भूल गया था मैं कि कुछ यादों में अभी जान बाकी है उन लमहों की, जिन्हें अफ़साना बनने… Continue reading

आदतें. . .

“आदत के बाद दर्द भी देने लगा मज़ा, वक़्त की वफ़ा अब मुझसे है खफ़ा मीठा ये ज़हर, बेअसर अब होने लगा, नमक ज़ख्म से भला मुँह क्यों फेरने लगा, सोचा, ज़हर से… Continue reading

एहसास . . .

“एक बस एहसास ही तो हैं जो रह जाता है उमर साथ गुज़ारने के लिए। फिर एक बार गुज़रते वक़्त को थामने के लिए। उधड़े हुए भरोसे को बाँधने के लिए। ज़िन्दगी के… Continue reading

दबाव

In life we may not know when the sides change and the onus is on us. Just a little thought. | दबाव | “मुझे आदत थी चिल्लाने की उन लोगों पर, जिनकी ज़ुबाँ… Continue reading

ख़लिश

“इन सरसराती हवाओं में ज़िन्दगी की ख़लिश है, वाकिफ करा देती हैं जो, उस गुज़रे हुए हर एक पल से। हलकी सीे इस रौशनी में, आग तो अभी भी जल रही है, लेकिन… Continue reading

“यह कैसा सौदा है ज़िन्दगी?”

यह कैसा सौदा है, ज़िन्दगी ? जहाँ बचपन की कीमत दौलत कमा के चुकाई है, ख़ुशी के लम्हें उन बंद कमरों में बिताये हैं। वोह ख्वाब ज़िम्मेदारियों के बदले गवाए हैं, और जहां… Continue reading

Kahin To. . . .

In raaton ki gehraaiyon mein kuchh dard sa hai, Agli subaah mein kuchh fark sa hai. Bebas ho jaata hai woh din, Jab log har subah jaagte hain, apni chingaari uss khaat par… Continue reading

Farishtey!

Kabhi hoti hai zindagi mein subah aisi, Subah woh, Jo ban jaaye ek raat, Ek raat woh, Jo rahegi ab saath, Ek saath woh, Jahaa ho sab tanhaa, Tanhaa woh, Jahaan koi hai… Continue reading

‘Khaamoshiyaan’

Dil me dafn ek dard hai, Hai wo khaamoshi. Zubaan pe jo lafz naa aaye, Hai wo khaamoshi. Jab aankho mein ho nami, ek waisi bhi hai khaamoshi. Jahaan baste the sapney kabhi,… Continue reading