अभी वक़्त बाकी है. . .

“अभी वक़्त बाकी है, 
ये ज़िन्दगी के लम्हे जो  
आहिस्ताआहिस्ता बीत रहे हैं 
इनमे कुछ ख्वाब जल कर राख हो गए, 
तो कुछ अरमान अभीअभी  
सुलग गए मेरे सीने में  

 मैंने रंगो में नहीं, 
मौसमों में बिताई है अपनी दुनिया, 
कभी बारिश में भीगा हूँ, 
तो कभी बारिश से बचाता लाया हूँ,
अपनी कश्तीकागज़ की।  

गर भीग जाती ये उस बारिश में, 
तो मैं डूब जाता 
या फिर मेरे ख्वाब नम पड़ जाते, 
बेजान वो ख्वाब 
बस एक ख्वाब बनकर रह जाते।  

ये तूफान का गहरा शोर भी  
मेरी बबेज़ुबां आवाज़ को दबा देता हैं, 
मानो, आहिस्ता-आहिस्ता गर्दन 
कटती महसूस होती है, सलीके से।  

मगर अब लगता है, हाँ शायद, 
हाँ शायद ये तूफान थम गया, 
ठंडी हवाओँ के झोंकों में 
पत्तों की सरसराहट बता रही है, 
कि, अभी भी वक़्त बाकी है।”


– Kabir Malik
21/03/2016

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